हमारे संचालक
"सेवा परमो धर्म:" के मूल मंत्र को आत्मसात करते हुए संजय जी पिछले 15 वर्षों से समाज सेवा के क्षेत्र में सक्रिय हैं। रामकृष्ण मिशन से प्रेरित होकर इन्होंने इस संस्था की स्थापना की। इनका मानना है कि "समाज सेवा ही सच्ची ईश्वर भक्ति है"। इनके नेतृत्व में हमारी संस्था ने 100+ गाँवों में शिक्षा, स्वास्थ्य और स्वावलंबन के कार्यक्रम चलाए हैं।
सचिव
"समाज सेवा मेरी साधना"
धर्म प्रचारक
"धर्म और सेवा का संगम"
स्वयंसेविका
"सेवा ही मेरा धर्म"
"यद्यदाचरति श्रेष्ठस्तत्तदेवेतरो जनः।
स यत्प्रमाणं कुरुते लोकस्तदनुवर्तते॥"
- भगवद्गीता (3.21)
हमारी टीम का मार्गदर्शन करने वाला यह श्लोक हमें सिखाता है कि समाज के श्रेष्ठजनों के आचरण का अनुसरण सभी करते हैं। इसलिए हम सदैव उच्च आदर्शों के साथ सेवा कार्य करते हैं।