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सेवा पथ पर साथ चलें

"अपने कर्तव्य का पालन करो, क्योंकि कर्म ही पूजा है" - भगवद्गीता। हमारी संस्था से जुड़कर समाज सेवा के इस पुण्य कार्य में सहभागी बनें।

दान का महत्व

"दानं भागवतं प्रोक्तं" - दान को भगवान की सेवा माना गया है। हमारे प्रोजेक्ट्स में सहयोग करें।

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"परोपकाराय सतां विभूतय:" - महाजनों का धन परोपकार के लिए होता है। सेवा में सहभागिता करें।

हमारे केंद्र

वसुधैव कुटुम्बकम के सिद्धांत पर कार्यरत हमारे समाज केंद्रों में आमंत्रित हैं।