हमारी संस्था
वर्ष 2010 में स्थापित हमारी संस्था "सर्वे भवन्तु सुखिनः" के मूल मंत्र पर कार्य करती है। हमारा उद्देश्य समाज के हर वर्ग को शिक्षा, स्वास्थ्य और आध्यात्मिक विकास के अवसर प्रदान करना है।
"वसुधैव कुटुम्बकम" के सिद्धांत पर आधारित समरस समाज का निर्माण
धर्म, संस्कृति और सेवा के माध्यम से सामाजिक परिवर्तन लाना
मंदिर विकास एवं संरक्षण
वैदिक शिक्षा कार्यक्रम
अन्नदान एवं वस्त्रदान
महिला सशक्तिकरण
हमारी गतिविधियाँ
हम ग्रामीण क्षेत्रों में प्राचीन मंदिरों के जीर्णोद्धार एवं रखरखाव का कार्य करते हैं
और जानें"दानं भागवतं प्रोक्तं" के सिद्धांत पर हम विभिन्न दान कार्यक्रम आयोजित करते हैं
और जानेंहमारे "वेद पाठशाला" केंद्रों में बच्चों को निःशुल्क संस्कृत एवं वैदिक ज्ञान की शिक्षा
और जानेंनियमित गीता पाठ एवं व्याख्यान कार्यक्रमों के माध्यम से युवाओं को कर्मयोग की शिक्षा
और जानें"स्त्री शक्ति" परियोजना के तहत हम ग्रामीण महिलाओं को स्वावलंबी बनाने हेतु प्रशिक्षण
और जानें"वसुधैव कुटुम्बकम" की भावना से हम जरूरतमंदों को भोजन, वस्त्र एवं चिकित्सा सहायता
और जानेंबुध ०६:३०
"राम राज्य" के आदर्शों को समर्पित यह वार्षिक उत्सव हमारी संस्था द्वारा आयोजित किया जाता है। कार्यक्रम में श्रीरामचरितमानस पाठ, भजन-कीर्तन और सामुदायिक भोज (सात्विक अन्न) का आयोजन होगा। साथ ही बाल राम के लिए विशेष श्रृंगार प्रतियोगिता भी आयोजित की जाएगी।
सहभागी बनें
रवि ०९:००
भगवद्गीता के ज्ञान को समर्पित यह दिवस हम विशेष रूप से मनाते हैं। कार्यक्रम में गीता पाठ, विद्वानों के व्याख्यान और युवाओं के लिए गीता ज्ञान प्रतियोगिता का आयोजन होगा। साथ ही "कर्मयोग और आधुनिक जीवन" विषय पर परिचर्चा भी होगी।
सहभागी बनें
गुरु १०:००
"अन्नदान महादान" के सिद्धांत पर आधारित यह विशेष कार्यक्रम हम स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर आयोजित करते हैं। 5000 गरीब परिवारों को सात्विक भोजन वितरित किया जाएगा। स्वयंसेवकों के लिए पंजीकरण खुला है - "सेवा ही सच्ची पूजा है"।
सहभागी बनें
"उतिष्ठत जाग्रत प्राप्य वरान्निबोधत।
क्षुरस्य धारा निशिता दुरत्यया दुर्गं पथस्तत्कवयो वदन्ति॥"
- कठोपनिषद् (1.3.14)
हमारे सभी कार्यक्रमों का उद्देश्य इसी उपनिषदीय आह्वान के अनुरूप समाज को जागृत करना है।
"सेवा परमो धर्म:" - इस लेख में जानिए कैसे हिंदू धर्म में सेवा को सर्वोच्च धर्म माना गया है। भगवद्गीता के अनुसार निष्काम कर्म और समाज कल्याण का महत्व...
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"दानं भागवतं प्रोक्तं" - जानिए क्यों दान को हिंदू परंपरा में मोक्ष प्राप्ति का मार्ग माना गया है। विभिन्न प्रकार के दान (विद्यादान, अन्नदान) और उनका आधुनिक समय में महत्व...
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कैसे हिंदू त्योहार सामाजिक सद्भाव को बढ़ावा देते हैं। रामनवमी से लेकर ओणम तक - सभी उत्सवों में छुपा है समाज कल्याण का संदेश। पढ़िए हमारे सामाजिक कार्यक्रमों के बारे में...
पूरा पढ़ेंहमारे संचालक
"सेवा परमो धर्म:" के मूल मंत्र को आत्मसात करते हुए संजय जी पिछले 15 वर्षों से समाज सेवा के क्षेत्र में सक्रिय हैं। रामकृष्ण मिशन से प्रेरित होकर इन्होंने इस संस्था की स्थापना की। इनका मानना है कि "समाज सेवा ही सच्ची ईश्वर भक्ति है"। इनके नेतृत्व में हमारी संस्था ने 100+ गाँवों में शिक्षा, स्वास्थ्य और स्वावलंबन के कार्यक्रम चलाए हैं।
सचिव
"समाज सेवा मेरी साधना"
धर्म प्रचारक
"धर्म और सेवा का संगम"
स्वयंसेविका
"सेवा ही मेरा धर्म"
"यद्यदाचरति श्रेष्ठस्तत्तदेवेतरो जनः।
स यत्प्रमाणं कुरुते लोकस्तदनुवर्तते॥"
- भगवद्गीता (3.21)
हमारी टीम का मार्गदर्शन करने वाला यह श्लोक हमें सिखाता है कि समाज के श्रेष्ठजनों के आचरण का अनुसरण सभी करते हैं। इसलिए हम सदैव उच्च आदर्शों के साथ सेवा कार्य करते हैं।